शत शत ओ पुरुष
शत शत रे नमन।
मत मान ले नर
नारी को खिलौना
खेल लिया और
 तोड़ दिया
यह नारी है
अबला ना समझ
जो पड़ती है नर पर भारी
व्याकरण उठा के  देख पुरुष
आएगी समझ तब
नर की नारी
वो तेरे जुर्मो को सहती है
तो खुद में  तू बलबान नही
वो अबला से बलबान बनी
उसमे भी रहा तेरा योगदान
तेरे इन अत्याचारों से
सीता से बना दी चण्डी काली
है धन्य बड़ा तू अज्ञानी
शत शत ओ पुरुष
शत शत रे नमन।।


संगीता राजपूत


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